क्या आप इन छः हरी सब्जियों को खाने के फायदे जानते है
(1) पालक हरी पत्तेदार सब्जियों में उसका अपना एक अपना अलग मुकाम है
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पालक हरी पत्तेदार सब्जियों में से एक है। इसमें एंटीऑक्सीडेंट सहित कई तरह के पोषक तत्व पाये जाते हैं। भोजन में पालक का उपयोग कई तरीके से किया जाता है। सब्जी के अलावा इसे सूप, जूस कई और व्यंजन बनाने में भी किया जाता है। आमतौर पर पालक पूरे वर्ष हर मौसम में असानी से मिल जाता है लेकिन सर्दियों के मौसम में यह बहुतायत पाया जाता है। पालक आयरन के अलावा पिगमेंट, विटामिन, मिनरल और फाइटोन्यूट्रिएंट का अच्छा स्रोत होता है। पालक खाने से स्वास्थ्य को कई फायदे होते हैं। इस आर्टिकल में हम आपको पालक खाने के फायदे बतायेगे
पालक में वसा तथा कैलोरी बहुत कम मात्रा में पायी जाती है इसकी वजह से पालक वजन घटाने में काफी उपयोगी है। इसमें कई पोषक तत्वों के अलावा फैट में घुलनशील फाइबर भी पाया जाता है। यह फाइबर भोजन पचाने में सहायक होता है जिससे व्यक्ति को कब्ज की समस्या नहीं होती है और ब्लड शुगर भी बेहतर रहता है और आपको अधिक भोजन करने की जरूरत नहीं पड़ती है जिसकी वजह से आपका वजन नहीं बढ़ता है। विशेषज्ञ भोजन में पालक खाने की सलाह देते हैं इससे हमारा स्वास्थ्य ठीक रहता है और मोटापा भी नहीं बढ़ता है
(2) कुंदरू हरी सब्जियों में एक है इसके खाने के अनेक फायदे
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कुंदरू एक स्वादिष्ट सब्जी होने के साथ पौष्टिक भी है। आयुर्वेदिक दृष्टि से इसके मूल (जड़) वमनकारक, रेचक, शोधघ्कुंदरू एक स्वादिष्ट सब्जी होने के साथ पौष्टिक भी है। आयुर्वेदिक दृष्टि से इसके मूल (जड़) वमनकारक, रेचक, शोधघ्न (सूजन को कम करने वाले) होते हैं। इसके फल गरिष्ठ, मधुर व शीतल होते हैं।
इनकी रोपाई फरवरी के दूसरे सप्ताह से लेकर मार्च के प्रथम सप्ताह तक कर दी जाना आवश्यक है। पौध पोषण के लिए प्रति एक गड्ढा दो डलिया पौध मिश्रण भरें। पौधे जम जाने व स्थापित हो जाने के बाद यानी रोपाई के लगभग 25-30 दिन बाद प्रति गड्ढा 500 ग्राम यूरिया, आधा किग्रा सुपर फॉस्फेट, 250 ग्राम म्यूरेट ऑफ पोटाश मिलाकर गड्ढे की मिट्टी के साथ मिलाकर सिंचाई करें। लताएँ बड़ी होने पर इन्हें टेलीफोन पद्धति से बनाए गए खुले मचान पर चढ़ाकर प्रत्येक शाखा को बाँधकर फैलाते जाएँ। इनमें समय-समय पर निंदाई, गुड़ाई व सिंचाई करते रहें।
मिट्टी व मौसम के अनुसार 5 से 10 दिन के अंतर पर सिंचाई करते रहें। फूल और फल आते समय क्यारी में लगातार नमी बनी रहनी चाहिए। अधिक गीलापन, लताओं की जड़ों के लिए हानिकारक होता है। लगातार गीलापन रहने से पौधों की जड़ों का श्वसन रुक जाता है और पौधों की बढ़वार रुक जाती है।
फूल और फलन के समय कीड़ों की रोकथाम के लिए 5 मिली नीम तेल प्रति 1 लीटर पानी व 2 ग्राम डिटर्जेंट मिलाकर छिड़कें। किसी भी तेज कीटनाशक रसायन के प्रयोग से फूलों के परागण पर और अंततः उपज पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इसमें फल 5 से 7 माह में लगना शुरू होकर लगातार 4-5 माह तक मिलते रहते हैं। फलों की तुड़ाई कच्चे व नरम रहते ही करते रहना आवश्यक है। सामान्यतः प्रति 3 से 5वें दिन फलों की तुड़ाई की जाती है।
विटामिनों की भरमार : यह एक स्वादिष्ट सब्जी होने के साथ पौष्टिक भी है। इसके प्रति 100 ग्राम खाद्य अंश में लगभग 4.6 प्रश कार्बोहाइड्रेट्स, 1.4 प्रश प्रोटीन एवं प्रति 100 ग्राम में 10 मिग्रा कैल्शियम, 30 मिग्रा फॉस्फोरस, 0.7 प्रश लौह तत्व, 84 अंतरराष्ट्रीय इकाई विटामिन ए के अलावा विटामिन बी-1, बी-2 विटामिन सी आदि पाए जाते हैं।
आयुर्वेदिक दृष्टि से इसके मूल (जड़) वमनकारक, रेचक, शोधघ्न (सूजन को कम करने वाले) होते हैं। इसके फल गरिष्ठ, मधुर व शीतल होते हैं। कुंदरू के कडुवे फल साँस रोगों, बुखार एवं कुष्ठ रोग के शमन के लिए उपयोग में लाए जाते हैं। मधुमेह में इसकी पत्तियों का चूर्ण जामुन की गुठली के चूर्ण व गुड़मार के साथ दिया जाना लाभदायक है।
न (सूजन को कम करने वाले) होते हैं। इसके फल गरिष्ठ, मधुर व शीतल होते हैं।
इनकी रोपाई फरवरी के दूसरे सप्ताह से लेकर मार्च के प्रथम सप्ताह तक Z 1 लीटर पानी व 2 ग्राम डिटर्जेंट मिलाकर छिड़कें। किसी भी तेज कीटनाशक रसायन के प्रयोग से फूलों के परागण पर और अंततः उपज पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इसमें फल 5 से 7 माह में लगना शुरू होकर लगातार 4-5 माह तक मिलते रहते हैं। फलों की तुड़ाई कच्चे व नरम रहते ही करते रहना आवश्यक है। सामान्यतः प्रति 3 से 5वें दिन फलों की तुड़ाई की जाती है।
विटामिनों की भरमार : यह एक स्वादिष्ट सब्जी होने के साथ पौष्टिक भी है। इसके प्रति 100 ग्राम खाद्य अंश में लगभग 4.6 प्रश कार्बोहाइड्रेट्स, 1.4 प्रश प्रोटीन एवं प्रति 100 ग्राम में 10 मिग्रा कैल्शियम, 30 मिग्रा फॉस्फोरस, 0.7 प्रश लौह तत्व, 84 अंतरराष्ट्रीय इकाई विटामिन ए के अलावा विटामिन बी-1, बी-2 विटामिन सी आदि पाए जाते हैं।
आयुर्वेदिक दृष्टि से इसके मूल (जड़) वमनकारक, रेचक, शोधघ्न (सूजन को कम करने वाले) होते हैं। इसके फल गरिष्ठ, मधुर व शीतल होते हैं। कुंदरू के कडुवे फल साँस रोगों, बुखार एवं कुष्ठ रोग के शमन के लिए उपयोग में लाए जाते हैं। मधुमेह में इसकी पत्तियों का चूर्ण जामुन की गुठली के चूर्ण व गुड़मार के साथ दिया जाना लाभदायक है।
(3) चौलाई मूल रूप से दो कलर में पाए जाते है लाल और हरे रंग के लाल वाले चौलाई में ज्यादा विटामिन पाए जाते है
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आँखों के लिए चौलाई बहुत ही लाभदायक होती है।
चौलाई की भाजी खून की कमी को पूरा करती है और खून साफ़ भी करती है।
कैल्शियम, फॉस्फोरस, विटामिन ‘ए’ और ‘सी’ जैसे तत्व भरपूर मात्रा में होते हैं।
स्त्रीरोगों जैसे श्वेतप्रदर, रक्तप्रदर, में भी चौलाई अत्यंत गुणकारी होती है।
शीतपित्त, गठिया, पुराना बुखार, हृदय रोग, और बाल झड़ना इन सभी समस्याओं के लिए चौलाई बहुत लाभकारी है।
बालों के लिए
यह आपके बालों को समय से पहले सफ़ेद होने से बचाती है। चौलाई को खाने में शामिल करेंगे तो आप इस समस्या से मुक्ति पा सकते है।
चौलाई में लाइसिन अच्छी मात्रा में होता है। यह कैल्शियम को अवशोषित करने में हमारे शरीर की मदद करता है।
मांसपेशियों के निर्माण और ऊर्जा के लिए चौलाई बहुत लाभकारी है। मांसपेशियों को कैसे रखें स्वस्थ यहाँ पढ़ सकते है।
अगर शरीर की रोग प्रतिरोधक प्रणाली कमजोर है। तो इसको बढ़ाने में चौलाई हमारे शरीर की मदद करती है।
चौलाई में एंटी ऑक्सीडेंट, विटामिन, और खनिज होते है। जो शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को ठीक करने में मदद करती है
चौलाई गुर्दे की पथरी गलाने में सक्षम होती है। 40-45 दिन रोजाना चौलाई खाने पर पथरी गल जाती है।
(4) हरी सब्जियों के बीच आकर्षित करने वाला करेला,
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हरी सब्जियों के बीच आकर्षित करने वाला करेला, स्वाद में भले ही कड़वा लगता हो, लेकिन इससे होने वाले फायदे जरूर मीठे हैं। क्या आप जानते हैं, करेले से स्वास्थ्य को होने वाले इन लाभों के बारे में। अगर नहीं जानते, तो पढ़िए कड़वे करेले के यह फायदे
करेले में फास्फोरस पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है। यह कफ, कब्ज और पाचन संबंधी समस्याओं को दूर करता है। इसके सेवन से भोजन का पाचन ठीक तरह से होता है, और भूख भी खुलकर लगती है।
अस्थमा की शिकायत होने पर करेला बेहद फायदेमंद होता है। दमा रोग में करेले की बगैर मसाले सब्जी खाने से लाभ मिलता है।
पेट में गैस बनने और अपच होने पर करेले के रस का सेवन करना अच्छा होता है, जिससे लंबे समय के लिए यह बीमारी दूर हो जाती है।
करेले का जूस पीने से लीवर मजबूत होता है और लीवर की सभी समस्याएं खत्म हो जाती है। प्रतिदिन इसके सेवन से एक सप्ताह में परिणाम प्राप्त होने लगते हैं। इससे पीलिया में भी लाभ मिलता है।
करेले की पत्तियों या फल को पानी में उबालकर इसका सेवन करने से, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, और किसी भी प्रकार का संक्रमण ठीक हो जाता है।
उल्टी-दस्त या हैजा हो जाने पर करेले के रस में काला नमक मिलाकर पीने से तुरंत आराम मिलता है। जलोदर की समस्या होने पर भी दो चम्मच करेले का रस पनी में मिलाकर पीने से लाभ होता है।
लकवा या पैरालिसिस में भी करेला बहुत कारगर उपाय है। इसमें कच्चा करेला खाने से रोगी के लिए लाभदायक होता है।
खून साफ करने के लिए भी करेला अमृत के समान है। मधुमेह में यह बेहद असरकारक माना जाता है। मधुमेह में एक चौथाई कप करेले का रस, उतने ही गाजर के रस के साथ पीने पर लाभ मिलता है।
खूनी बवासीर में करेला अत्यंत लाभदायक है। एक चम्मच करेले के रस में आधा चम्मच शक्कर मिलाकर पीने से इसमें आराम होता है।
गठिया व हाथ पैरों में जलन होने पर करेले के रस की मालिश करना लाभप्रद होता है।
किडनी की समस्याओं में करेले का उबला पानी व करेले का रस दोनों ही बेहद लाभकारी होते हैं।यह किडनी को सक्रिय कर, हानिकारक तत्वों को शरीर से बाहर करने में मदद करता है।
ह्दय संबंधी समस्याओं के लिए करेला एक बेहतर इलाज है। यह हानिकारक वसा को ह्दय की धमनियों में जमने नहीं देता जिससे रक्तसंचार व्यवस्थित बना रहता है, और हार्ट अटैक की संभावना नहीं होती।
(5) आमतौर पर लोग लौकी खाने से बचते हैं.
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आमतौर पर लोग लौकी खाने से बचते हैं. कुछ को इसका स्वाद पसंद नहीं होता है तो कुछ को ये पता ही नहीं होता है कि ये कितनी फायदे चीज है. अगर आपको भी ये लगता है कि लौकी खाने से कोई फायदा नहीं है तो आपको बता दें कि ऐसा नहीं है. लौकी एक बेहद फायदेमंद सब्जी है, जिसके इस्तेमाल से आप कई तरह की बीमारियों से राहत पा सकते हैं.
.वजन कम करने में मददगार
कुछ ही लोगों को ये पता होगा कि लौकी खाने से वजन कम होता है. आपको शायद इस बात पर यकीन न हो लेकिन किसी भी दूसरी चीज की तुलना में लौकी ज्यादा तेजी से वजन कम करती है. आप चाहें तो लौकी का जूस नियमित रूप से पी सकते हैं. इसके अलावा आप चाहें तो इसे उबालकर, नमक डालकर भी इस्तेमाल में ला सकते हैं.
नेचुरल ग्लो के लिए
लौकी में नेचुरल वॉटर होता है. ऐसे में इसके नियमित इस्तेमाल से प्राकृतिक रूप से चेहरे की रंगत निखरती है. आप चाहें तो इसके जूस का सेवन कर सकते हैं या फिर उसकी कुछ मात्रा हथेली में लेकर चेहरे पर मसाज कर सकते हैं. इसके अलावा लौकी की एक स्लाइस को काटकर चेहरे पर मसाज करने से भी चेहरे पर निखार आता है.
मधुमेह
रोगियों के लिए
मधुमेह के रोगियों के लिए लौकी किसी वरदान से कम नहीं है. प्रतिदिन सुबह उठकर खाली पेट लौकी का जूस पीना मधुमेह के मरीजों के लिए बहुत फायदेमंद होता है.
पाचन क्रिया को दुरुस्त रखने के लिए
अगर आपको पाचन क्रिया से जुड़ी कोई समस्या है तो लौकी का जूस आपके लिए बेहतरीन उपाय है. लौकी का जूस काफी हल्का होता है और इसमें कई ऐसे तत्व होते हैं जो कब्ज और गैस की समस्या में राहत देने का काम करते हैं. पोषक तत्वों से भरपूर
लौकी में कई तरह के प्रोटीन, विटामिन और लवण पाए जाते हैं. इसमें विटामिन ए, विटामिन सी, कैल्शियम, आयरन, मैग्नीशियम पोटेशियम और जिंक पाया जाता है. ये पोषक तत्व शरीर की कई आवश्यकताओं की पूर्ति करते हैं और शरीर को बीमारियों से सुरक्षित भी रखते हैं.
कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने के लिए
लौकी का इस्तेमाल करना दिल के लिए बेहद फायदेमंद होता है. इसके इस्तेमाल से हानिकारक कोलेस्ट्रॉल कम हो जाता है. कोलेस्ट्रॉल की मात्रा अधिक होने से दिल से जुड़ी कई बीमारियों के होने का खतरा बढ़ जाता है.
(6) भिंडी को अपनी थाली में रोजाना शामिल करके आप कई रोगों को छुटटी कर सकते है क्या आप नही जानते भिंडी खाने से कितने फायदे हो सकते है
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भिंडी को अपनी थाली में शामिल करके आप कैंसर को दूर भगा सकते हैं। खासतौर से कोलन कैंसर को दूर करने में भिंडी बहुत फायदेमंद है। यह आंतों में मौजूद विषैले तत्वों को बाहर निकालने में मदद करती है, जिससे आंतें स्वस्थ रहती हैं और बेहतर तरीके से कार्य करती हैं।
भिंडी में पाया जाने वाला लसलसा पदार्थ हमारी हड्डियों के लिए उपयोगी होता है। इसमें पाया जाने वाला विटामिन-के हड्डियों को मजबूत बनाने में सहायक होता है।
विटामिन-ए, बीटा कैरोटीन और एंटी-ऑक्सीडेंटद्यस से भरपूर होती है, जो सेल्युलर चयापचय से उपजे मुक्त कणों को समाप्त करने में सहायक होते हैं। यह कण नेत्रहीनता के लिए जिम्मेदार होते हैं। इसके अलावा भिंडी मोतियाबिंद से भी बचाती है।
गर्भावस्था में भिंडी का सेवन लाभदायक होता है। भिंडी में फोलेट नाम का एक पोषक तत्व पाया जाता है जो भ्रूण के दिमाग के विकास को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।इसके अलावा भिंडी में कई तरह के पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो सेहत के लिए फायदेमंद होते हैं।
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